प्रधानमंत्री ई-चार्जिंग स्टेशन योजना

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प्रधानमंत्री ई-चार्जिंग स्टेशन योजना को बढ़ावा देने के लिए नई योजना की शुरुआत की है जिसका नाम ई-वाहन चार्जिंग स्टेशन योजना है |

जैसे देश में Petrol pump और CNG पंप है| ऐसे ही भारत सरकार Electric गाड़ियों के लिए Charging Station खोलने का आप के पास सुनहरा अवसर है|

चार्जिंग स्टेशन खोलने के लिए भारत सरकार ने पालिसी बनाई है जिसके द्वारा आप स्टेशन खोल सकते है

प्रधानमंत्री ई-चार्जिंग स्टेशन योजना खोलने का विवरण

प्रधानमंत्री इले‍क्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्‍टेशन अगर खोलना चाहते है अपने घरों या दफ्तरों में खोल सकते है |

अगर आप अपने ऑफिस में चार्जिंग स्टेशन खोलते है तो उसके लिए आपको पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी डिस्कॉम आपको मदद करेगी | ये फेसला आपका रहेगा की आप फास्ट या स्लो चार्जर का उपयोग कर सकते है |

चार्जिंग स्टेशन के लिए आपको केंद्रे सरकार आप सब्सिड़ी भी देगी |

प्रति यूनिट लागत विवरण

इले‍क्ट्रिक वाहन चारगीन स्टेशन के लिए आपको लाइसेंस लेने की जरुरत नहीं है | बिना लाइसेंस के आप अपने घर , ऑफिस में चार्जिंग स्टेशन खोल सकते है |

मोदी सरकार ने योजना को बढ़ावा के लिए ये पॉलिसी तैयार कर सकती है |

इले‍क्ट्रिक वाहन चार्जिंग Station की गाइडलाइन के अनुशार पब्लिक चार्जिंग स्टेशन खोलने के मालिकों को CCS, CHAdeMO, Type-2 AC, Bharat AC 001 जैसे चार्जर इंस्टॉल करने होंगे।

इसमें आपको प्रति 6 रूपये से कम यूनिट के हिसाब से आपको चार्जिंग के पैसे देने होंगे |

ई-रिक्शा चार्जिंग की लागत

ई-रिक्शा या इलेक्ट्रिक वाहन के प्रति 1 रुपये किलोमीटर की लागत से आपका वाहन चलेगा |

हालांकि, अब गैसोलीन या डीजल संचालित वाहनों की प्रति वाहन की लागत लगभग 6.50 रुपये प्रति किलोमीटर आती है।

इससे देश में बढ़ रहे प्रदूषण पर भी रोक लगेगी |

लाइसेंस की कोई ज़रूरत नहीं

प्रधानमंत्री Electric Vehical Charging Station योजना के तहत ई-वाहन चार्जिंग Station स्थापित करने के लिए किसी भी प्रकार के लाइसेंस की आवश्यकता नहीं है ।

2030 तक ई-वाहनों के व्यापक उपयोग का लक्ष्य

ई-वाहनों को बढ़ावा देने के लिए एक साल के भीतर हाईवे पर दोनों तरफ चार्जिंग स्टेशन लगाए जाएंगे| क्योंकि जल्द ही बाजार में इलेक्ट्रॉनिक गाडी चलने वाली है |

खबर में मुताबिक मारुती सुजुकी ने छोटी डीजल कारें बंद कर दी है | सरकार 2030 तक देश के व्यापक उपयोग के लिए ई-वाहनों को लागू करने जा रही है।

इसका मुख्य उद्देश्य 2050 के तीसरे स्तर पर कार्बन उत्सर्जन को कम करना है।

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